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अतरंगी दुल्हनिया – Part -1

उसकी ख़ूबसूरती के चर्चे दूर-दूर तक थे, गाँव के इस छोर से उस छोर तक लोग उसकी बातें किया करते थे। गठिला बदल, आसमानी आँखें, और एक दम दूध सी सफ़ेद। लोग तारीफ़ के साथ उसके क़िस्मत को भी कोसते थे और कहते थे भला किस घड़ी में ऐसी क़िस्मत लिखी होगी लिखने वाले ने कि एक सौंदर्य-स्वरूपणी को अधकच्चे पुरुष के साथ बाँध दिया।

हार कर वो घर आया[He came home after giving up]

हार कर वो घर आया, जो सुबह सपने ले उड़ा था,दिन को जलकर भी शाम को फिर वहीं खड़ा है,दर्द से आहत भी, ग़म भी है, और ज़िंदा भी है,कुछ दिल से तोलते है और कुछ आँखों से,देखता है वो चेहरे को बदलते हुए मौसमों से,हँस देता है हँसी पे और तन्हाई में रोता है। … Continue reading हार कर वो घर आया[He came home after giving up]

मैं आज भी उन्ही कहानियों में हुँ

मैं उन्ही कहानियों में आज भी हुँ जिन में ज़िंदगी को पहली बार देखा था। वो छोटे-छोटे क़दमों से नंगे आसमान में खाली पाँव भागने की जिद्द करता और सहसा बरसात की बूँदो में अनंत ख़ुशी को पाता। मेरी ख्वाहिसें जो चाँद ऊपर बैठते थे, कही छुप गये है, मगर जब भी देखता हुँ चाँद … Continue reading मैं आज भी उन्ही कहानियों में हुँ

[Hindi] इश्क़ करें जो ज़ाहिर हो

वो समय समेटे सपनों से, जो एक हक़ीक़त बन जाती है,सपनों की अरथी ख़ुद लपटों में, तब जलने को हो जाती है।कोई चाँद नहीं ना तारे हो, न नाम इश्क़ का ज़ाहिर हो,तुम-हम, हम तुमसे इश्क़ करे, बस मन ही मन न बाहिर हो।। ये बंदिशों में क़ैद मोहब्बत, जो धूप छांव में होती है,सपनों … Continue reading [Hindi] इश्क़ करें जो ज़ाहिर हो

Sher-O-Shayari

कभी हम न कहेंगे हाल-ए-दिल,बस आँखों में पढ़ लेना तुम ।जो बात ज़ुबान पर रूकती नहीं,बस आँखों से कह देना तुम ।। Though I will never say what stays in my heart,just try to read it through my eyes.The thoughts of your heart that you can’t express,just try to tell me through your eyes.

Sher-O-Shayari

“न ज़मीं को तेरे, न आसमां को तेरे, न आबो- हवा, न शानो- शौक़त को तेरे । मिल गयी है जो ख़ाक में तुझे पाते-पाते,फिर तरसती है आलिंगन को तेरे ।। “ Translation: Neither for the land of your existence, nor for your charm,Neither for your possessions, nor for royal lifestyle.The love which has already … Continue reading Sher-O-Shayari

Main – ओस की एक बूँद

धर्म और तहज़ीब की अदालत है और फिर एक फिसलती जान है। ख़्वाब बंद आँखों में हिचकोले खाते है, और आँख खुलते ही ओझल हो जाते है। मैं ओस की बूँद ही तो हूँ, सुबह घासों की एक परत से चिपका रहता हूँ आँखें खुलती नहीं कि बंद हो जाती है। चारों तरफ़ दीवारें है, … Continue reading Main – ओस की एक बूँद

हर सुबह धूप नहीं होती मगर सूरज निकलता है

कभी ख़ुशी से आँखें खोले और इस दुनिया को एक बार फिर नयी तरह से देखें। संभव है? क्यूँ नहीं। मगर, फिर आशाओं की बरसात भी तो होनी है। हम भीगेंगे उस में; नहाएँगे; और फिर कल का सोच-सोचकर आज दुखी हो जाएँगे। मुमकिन है हम ज़्यादा सोचे और भूल जाएँ की कल फिर सुबह … Continue reading हर सुबह धूप नहीं होती मगर सूरज निकलता है

Sher-O-Shayari

एक रात बुझी लाशों को याद करें,फिर ख़ुद के होने का हिसाब करें।।

मुसाफ़िर

ख़ुश्बू, ख़्वाब, ख़बर, या ख़त हो,
कुछ तो रखकर भेज मुसाफ़िर।
अब तक काली रात रही है,
सुबह हुई पट खोल मुसाफ़िर।।

Smell, dream, news, or a letter,
Send something o’ traveler.
It has been a dark night so far,
Open the door it’s morning already.

जो चौखट लाँघ परिंदा

जो चौखट लाँघ परिंदा आज यहाँ से जाएगा,
फिर झूठी-जूठी खाने को वापस न आने पाएगा,
समय-समय जो आँखें खोले मूँद नहीं फिर पाएगा,

उन तस्वीरों में कुछ रंग शायद बाक़ी-सा है

उन तस्वीरों में कुछ रंग शायद बाक़ी-सा है,
दिलों पर सिरों का बोझ भी तनिक भाड़ी-सा है,
साँस शब्दों के उलझनों से आज़ाद कहाँ है,
गलियों में कोई मिलनसार कहाँ है,

चल आज वहाँ हम जंग करें ।

आँखों में आँखे डाल कर,
सूरज से भी, गगन से भी,
नीर, अग्न, पवन से भी,
जहाँ मृत हमारी काया हो,
चल आज वहाँ हम जंग करें ।

बड़ा अडिग है

बड़ा अडिग है, भिमकायसीने पर साँप सा भारी,खोने की खाँचों में बैठा,एक ख़ाक  बड़ा अभिमानी,वो सत में एक झूठ सा बैठा,झुठों में सतज्ञानि । आँखों से ओझल रहता है,पर दिमाग़ पर भाड़ी,सभी शब्दों में छिपा है जैसे,तेल पर तैरता पानी । जो कंकर को मोती कर दे,करुणा, प्रेम की छाया,जो हम-तुम को दूषित कर दे,द्वेष, … Continue reading बड़ा अडिग है

क़िस्मत के तराने

कितने दूर है, न जाने कहाँ है, मेरी क़िस्मत के तराने, किस गफ़लत में गुम है ।   न कोई आस, न उम्मीद में है, वो दूर कहीं ख़ुद ख़ाक में गुम है ।   एक प्यास जो इधर लिए बैठा हूँ, जिस तड़प में मन हिरण बन फिरता है ।   क्यूँ रात भी … Continue reading क़िस्मत के तराने

मृगतृष्णा

आग है, इक आग है,
जो दर्द की हुँकार है,
जलते जहाँ ग़म थे कभी,
अब जल रहें इंसान है ।।

अब कहाँ विकट अँधेरे में

अब कहाँ विकट अँधेरे में,
उजाले ढूंढ़ा करते हो ।
फिर आश बढ़ा उन लासों में,
इन्सानियत ढूंढ़ा करते हो ।
बुनियाद बानी थी फूसों की,
महलों को ताका करते हो ।
फिर आज घने अँधेरे में ,
राहों को देखा करते हो ।

महसूस होती है ।।

वो जो इश्क़ में महसूस होती थी,
है कहीं जो जल रही है,
महसूस होती है ।।

अपनी अदालत में खड़ी होकर,
अपनी सजा की गुहार लगाती,
एक तड़प की तपिश भी,
महसूस होती है ।।

वो अर्श से लेकर फ़र्श तक, बिखरने वाली मोहब्बत

आजा फिर करें एक बार, वो एक ड़ोर में बंधे, पास वाली मोहब्बत । बादलों से बरसने की, ग़ुज़ारिश वाली मोहब्बत । चिड़ियों से चहकने की, ख्वाहिश वाली मोहब्बत । वो शाम से ढलने की, ख़्वाहिसे वाली मोहब्बत । वो चाँद से चांदनी की, पूछने वाली मोहब्बत । वो अर्श से लेकर फ़र्श तक, बिखरने … Continue reading वो अर्श से लेकर फ़र्श तक, बिखरने वाली मोहब्बत

सोच

एक सोच क़हर है ढाने को, एक सोच है जीवन पाने को, लड़ना हर बात पर सोच है, एक सोच है प्यार फैलाने को । पत्थर की मूरत सोच है, मूरत, एक पत्थर, सोच । है सोच के अब तू हार गया, एक सोच है हारा पाने को ।। दिन का होना एक सोच है, … Continue reading सोच

यादें तेरी लाया हूँ

राहों के सुखे फूल सही, मैं तेरे लिए ही लाया हूँ । कुछ भूली बिसरी याद वही, मैं सब चुन चुन कर लाया हूँ । बीतें हर साल जो मिनटों -से, उनकी हर रात को लाया हूँ । सावन के झूलों की रस्सियां, डब्बे में भर कर लाया हूँ । नन्हे पावों की तेरी चप्पलें, … Continue reading यादें तेरी लाया हूँ

समझौता

कर ही लेते है समझौता, कल का भी, आज का भी, और हमारे आने वाले कल का भी, बीते दिनों की यादें अब मेरी, आने वाले कल की खुशियाँ अब तेरी ।। कुछ सपने जो देखें थे, वो मेरे और शहनाईयों की गूँज, अब तेरी । तेरे किस्से सब मेरे, और मै अजनबी बन तेरा … Continue reading समझौता

रौशनदान

रौशनदान से आती किरणे, सपनों से जगाती है, ये अन्वेषी आँखें, खड़ी हो रौशनदान को ताकती है, मेरा तन मिट्टी की सरोह में है, क्षमता से छिन्न हुँ, और लाचार बिना कदमों के, तंग जमाने के सूरते हाल को देखता हूँ, कभी नामवर को देखता हूँ , कभी यायावर को देखता हूँ । कभी खिड़कियों … Continue reading रौशनदान

जगह तो बहुत है

जगह तो बहुत है मेरे दिल में, यहाँ राम भी बस्ते है, रहमान भी बस्ते है ।। जगह तो बहुत है मेरे कूचे में, नमाज़ भी पढ़ लेता हूँ, पूजा भी कर लेता हूँ ।। जगह तो बहुत है मेरे शहर में, मंदिरों की घंटियाँ भी बजा लेता हूँ, मस्जिदों में सज़दा भी कर लेता … Continue reading जगह तो बहुत है

एक ख़त

एक ख़त में गुम थे कई जज़्बात, तुम्हें भेज रहा हूँ | तुम्हारी यादों के कुछ नगीने , तुम्हें भेज रहा हूँ । सर्द हवाओं की वो अंगड़ाइयाँ कही दफ़्न न हो जाए वो हर्फ़-ए-जवानी, तुम्हें भेज रहा हूँ । बादलों की ये उमड़ जो यहाँ है, वहाँ भी तो होंगी चांदनी रातों को जलानेवाली … Continue reading एक ख़त