Hindi Writings

अतरंगी दुल्हनिया – Part -1

उसकी ख़ूबसूरती के चर्चे दूर-दूर तक थे, गाँव के इस छोर से उस छोर तक लोग उसकी बातें किया करते थे। गठिला बदल, आसमानी आँखें, और एक दम दूध सी सफ़ेद। लोग तारीफ़ के साथ उसके क़िस्मत को भी कोसते थे और कहते थे भला किस घड़ी में ऐसी क़िस्मत लिखी होगी लिखने वाले ने कि एक सौंदर्य-स्वरूपणी को अधकच्चे पुरुष के साथ बाँध दिया।

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मुसाफ़िर

ख़ुश्बू, ख़्वाब, ख़बर, या ख़त हो,
कुछ तो रखकर भेज मुसाफ़िर।
अब तक काली रात रही है,
सुबह हुई पट खोल मुसाफ़िर।।

Smell, dream, news, or a letter,
Send something o’ traveler.
It has been a dark night so far,
Open the door it’s morning already.

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जो चौखट लाँघ परिंदा

जो चौखट लाँघ परिंदा आज यहाँ से जाएगा,
फिर झूठी-जूठी खाने को वापस न आने पाएगा,
समय-समय जो आँखें खोले मूँद नहीं फिर पाएगा,

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उन तस्वीरों में कुछ रंग शायद बाक़ी-सा है

उन तस्वीरों में कुछ रंग शायद बाक़ी-सा है,
दिलों पर सिरों का बोझ भी तनिक भाड़ी-सा है,
साँस शब्दों के उलझनों से आज़ाद कहाँ है,
गलियों में कोई मिलनसार कहाँ है,

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अब कहाँ विकट अँधेरे में

अब कहाँ विकट अँधेरे में,
उजाले ढूंढ़ा करते हो ।
फिर आश बढ़ा उन लासों में,
इन्सानियत ढूंढ़ा करते हो ।
बुनियाद बानी थी फूसों की,
महलों को ताका करते हो ।
फिर आज घने अँधेरे में ,
राहों को देखा करते हो ।

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महसूस होती है ।।

वो जो इश्क़ में महसूस होती थी,
है कहीं जो जल रही है,
महसूस होती है ।।

अपनी अदालत में खड़ी होकर,
अपनी सजा की गुहार लगाती,
एक तड़प की तपिश भी,
महसूस होती है ।।

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5. हिंदी लेख और विचार


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